Gäzäl - naämaä
Lyrics by khatir Naqvi
जब उस झूल्फ की बात चली
ढलते ढलते रात ढली.......
इन आँखों ने लूट के भी
अपने उपर बात न ली
शम्मा का अंजाम न पूँछ
परवानो के साथ ज़ली
अब के भी वो दूर है
अब के भी बरसात चली
फिरभी चटकी फिरभी खिली
देखके सब हालात कली
'खातिर' ये है बाज़ ये दिल
इसमें जीत से मात भली....
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