Gäzäl - naämaä
Lyrics by Qateel Shifai
तूने ये फूल जो जुल्फोमे सजा रखा है
इक दिया है जो अंघेरोंमे जला रखा है
ले जाये कोई मुझको जीत कर नसीबो वाला
जिन्दगी ने मुझे दाँवपे लगा रखा है
जाने कब दिलमे कोइ झांकने वाला आ जाये
इसीलिए मैंने गिरेबांन खुला रखा है
इम्तहान और मेरी ज़ब्त का तुम क्या लोगे
मैंने घड़कन को भी सीने मे छुपा रखा है
दिल था एक शोला मग़र बीत गये दिन वो 'क़तिल'
अब खुरेदो न इसे राख मे क्या रखा है
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